जयपुर. 10 साल की मूक-बधिर बच्ची की जलने से मौत के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बच्ची की मौत जलने से नहीं जहर देने से हुई। सवाई मानसिंह अस्पताल में इलाज के दौरान मासूम को जहर दिया गया। पुलिस को माता-पिता और मामा पर जहर देने का शक है। बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर जब डॉक्टरों ने वेंटिलेटर पर लेने के लिए पूछा था तो घरवालों ने लिखित में मना कर दिया था। मामला करौली के हिंडौन का है। भरतपुर रेंज आईजी राहुल प्रकाश ने बताया- हिंडौन में बच्ची को 9 मई की सुबह घर से 100 मीटर दूर खेत में पेट्रोल डालकर जला दिया गया था। परिजनों उसे हिंडौन सिटी हॉस्पिटल लेकर गए थे, प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया था। निर्वस्त्र हालत में मिली बच्ची से रेप का भी शक जताया गया था। राहुल प्रकाश ने बताया 14 मई को मूक बधिर एक्सपर्ट ने बच्ची के बयान रिकॉर्ड किए थे। इसमें बच्ची ने उसके साथ रेप होने से मना किया था। डीएनए जांच रिपोर्ट में भी रेप की पुष्टि नहीं हुई थी। 20 मई को इलाज के दौरान मासूम की मौत हो गई थी। 21 मई को परिजनों ने गांव में अंतिम संस्कार कर दिया था। आईजी राहुल प्रकाश ने बताया- पुलिस ने बच्ची का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम करवाया था। 6 जून को मिली मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में बच्ची की मौत जहर से होना सामने आया। मेडिकल रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बच्ची को हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मौत से 24 घंटे पहले जहर दिया गया था। इससे पहले बच्ची की हालत में लगातार सुधार हो रहा था। जहर देने के कारण बच्ची की सांस रुकने लगी थी। डॉक्टरों को बच्ची को जहर देने का पता नहीं था। इस कारण जहर का कोई उपचार नहीं किया था। 19 मई को बच्ची बहुत धीरे-धीरे सांस ले रही थी। डॉक्टरों ने बच्ची को वेंटिलेटर पर लेने की सलाह दी थी। बच्ची के मामा ने डॉक्टरों को वेंटिलेटर पर लेने से लिखित में मना कर दिया था। मूक- बधिर एक्सपर्ट ने बच्ची को मोबाइल में 10-12 लोगों की फोटो दिखाई थी, जिसमें एक व्यक्ति की पहचान की थी। बच्ची ने इशारों में बताया था कि उसे पेट्रोल डालकर जलाया गया था। इसके अलावा उसके साथ कुछ गलत नहीं हुआ। बच्ची करौली में आवासीय मूक बधिर स्कूल में पढ़ रही थी। इस बार पांचवीं क्लास का एग्जाम दिया था। छुटि्टयां होने पर घटना वाले दिन से दो दिन पहले ही घर आई थी।

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