कोटा. कोटा के झाडोल गांव की रहने वाली तुलसा बाई की 6 महीने की बेटी बिसरता पर सियार ने घर में ही हमला कर दिया था। सिर जबड़ों में फंसा लिया और भागने लगा। मौत के मुंह मे बेटी को देख उसे बचाने के लिए मां ने पूरी ताकत झोंक दी।बच्ची के सिर से खून निकल रहा था। जगह-जगह दांतों के निशान बने हुए थे और गहरे घाव थे। गांव के एक लड़के के साथ बाइक पर बच्ची को गोद में लेकर इटावा अस्पताल पहुंची। वहां डॉक्टरों ने सिर पर पट्टी की और उसके बाद कोटा रेफर कर दिया। वहां से बच्ची को लेकर जेके लोन अस्पताल गए। बेटी की हालत को देख तुलसा कहती है कि गोद में लेकर बेटी को देखती हूं तो उसका चेहरा देखा नहीं जाता। इतना दर्द कैसे झेल पा रही होगी। पूरी रात रोते रोते गुजारी है। थोड़ी देर सो पाई मेरी बेटी। बच्ची का इलाज करने वाले डॉक्टर सुनीता खंडेलवाल ने बताया कि बच्ची के सिर पर काफी गहरे घाव थे। शुरुआत पर तो ऐसा लगा कि बच्ची की आंख पूरी तरह से चली गई हालांकि बाद में जब आंखों के डॉक्टर ने चेक किया तो थोड़ी राहत मिली है कि आंख बच जाएगी। बच्ची की हालत स्टेबल है. घाव भरने में तो थोड़ा समय लगेगा, लेकिन बच्ची को हाइड्रोफोबिया से बचाना ज्यादा जरूरी है। उसके लिए इंजेक्शन भी लगाए जा रहे हैं।

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